राम को देख कर के जनक नंदिनी, बाग़ में वो खड़ी की खड़ी रह गयी

Raam Ko Dekh Kar Ke Janak Nandini, Baag Mein Vo Khadi Kee Khadi Rah Gayi

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राम को देख कर के जनक नंदिनी,
बाग़ में वो खड़ी की खड़ी रह गयी।

राम देखे सिया को सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी॥

◾️ यज्ञ रक्षा में जा कर के मुनिवर के संग,
ले धनुष दानवो को लगे काटने।
एक ही बाण में ताड़का राक्षसी,
गिर जमी पर पड़ी की पड़ी रह गयी॥

◾️ राम को मन के मंदिर में अस्थान देकर,
लगी सोचने मन में यह जानकी।
तोड़ पाएंगे कैसे यह धनुष कुंवर,
मन में चिंता बड़ी की बड़ी रह गयी॥

◾️ विश्व के सारे राजा जनकपुर में जब,
शिव धनुष तोड़ पाने में असफल हुए।
तब श्री राम ने तोडा को दंड को,
सब की आँखे बड़ी की बड़ी रह गयी॥

◾️ तीन दिन तक तपस्या की रघुवीर ने,
सिंधु जाने का रास्ता न उनको दिया।
ले धनुष राम जी ने की जब गर्जना,
उसकी लहरे रुकी की रह गयी॥

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