बजरंग की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे श्लोक – लाल लंगोटा हाथ में सोटा झांकी अपरम्पार रूप अनोखा आज सजा है बोलो जय जयकार।बजरंग की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे बाबा की झांकी है अपार हनुमत की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे।। राम
प्यारे हनुमान बाला का घर है निराला यहाँ जिसने भी अलख जगाई उसने मन की मुरादे है पाई उसने मन की मुरादे है पाई प्यारे हनुमान बाला का घर है निराला।। आस्था के फूलों की जो माला पहनाएंगे उनकी राहों के कांटे फूल बन जाएंगे भूल के जहान सारा जिसने यहाँ पर शुद्ध भावना की
ना स्वर है ना सरगम है ना लय न तराना है हनुमान के चरणो में एक फूल चढ़ाना है।। तुम बाल समय में प्रभु सूरज को निगल डाले अभिमानी सुरपति के सब दर्प मसल डाले बजरंग हुए तब से संसार ने जाना है ना स्वर है ना सरगम हैं ना लय न तराना है।। सब
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु। कृपा कर अपनायो॥ जन्म जन्म की पूंजी पाई। जग में सबी खुमायो॥ खर्च ना खूटे, चोर ना लूटे। दिन दिन बढ़त सवायो॥ सत की नाव खेवटिया सतगुरु। भवसागर तरवयो॥ मीरा के प्रभु गिरिधर नगर। हर्ष हर्ष जस गायो॥ visited: 7,880
देता है वो राम का, कदम कदम पर साथ, रहे उसके सर पर हरदम-2, श्री राम प्रभु का हाथ, देता है वो राम का, कदम कदम पर साथ।। जहां जहां श्री राम चलेंगे, वहां वहां हनुमान जी, जैसे जैसे राम कहेंगे, वो ही करेंगे हनुमान जी, प्रभु श्री राम की देखो-2, माने वो सारी बात,
दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।। हो जाते है जिसके अपने पराये हनुमान उसको कंठ लगाये जब रूठ जाये संसार सारा बजरंगबली तब देते सहारा अपने भक्तो का बजरंगी मान करते है संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।। दुनिया में काम कोई ऐसा नहीं है हनुमान
देखा लखन का हाल तो श्री राम रो पड़े। अंगत सुग्रीव जामवंत बलवान रो पड़े॥ लंका विजय की अब मुझे, चाहत नहीं रही। मुझमें धनुष उठाने की, ताकत नही रही। रघुवर के साथ धरती, आसमान रो पड़े॥ करने लगे विलाप, श्री राम फुटकर। क्या मै जवाब दूँगा, अयोध्या में लौटकर। जितने थे मन में राम
दुनिया चले ना श्री राम के बिना राम जी चले ना हनुमान के बिना।। सीता हरण की कहानी सुनो बनवारी मेरी जुबानी सुनो सीता मिले ना श्री राम के बिना पता चले ना हनुमान के बिना ये दुनिया चले ना श्री राम के बिना राम जी चले ना हनुमान के बिना।। लक्ष्मण का बचना मुश्किल
दुःख सुख दोनो कुछ पल के कब आये कब जाये दुःख है ढलते सूरज जैसा शाम ढले ढल जाये दुःख सुख दोनो कुछ पल के कब आये कब जाये दुःख है ढलते सूरज जैसा शाम ढले ढल जाये हो.. शाम ढले ढल जाये दुःख तो हर प्राणी को होय राम ने भी दुःख झेला धैर्य