बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घने दिनों में आया

बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया

◾️ बालक था रे जब आया करता
रोज़ खेल के जाया करता
रे बालक था रे जब आया करता
रोज़ खेल के जाया करता
हुए के तकरार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया

◾️ मानने सुना दे कुटुम्ब कहानी
क्यूँ कर पद गी ठोकर खानी
रे मानने सुना दे कुटुम्ब कहानी
क्यूँ कर पद गी ठोकर खानी
तोते की मार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया

◾️ सब बच्चों का हाल सुना दे
मिस्रणी की बात बता दे
हो सब बच्चों का हाल सुना दे
मिस्रणी की बात बता दे
रे क्यूँ गया हार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया

◾️ चाहिए तारे तनने पहलाम आना
इतना दुख नही पड़ता थाना रे
चाहिए तारे तनने पहलाम आना
इतना दुख नही पड़ता थाना
क्यूँ भुल्लय प्यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया

◾️ आइब भी आ गया ठीक बख़त पे
आजा बैठ जा मेरे तखत पे
रे आइब भी आ गया ठीक बख़त पे
आजा बैठ जा मेरे तखत पे
हो जिगरी यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया

◾️ आजा भगत छ्चाटी पे ला लून
आइब बता तनने कड़े बिता लून
हो आजा भगत छ्चाटी पे ला लून
आइब बता तनने कड़े बिता लून
करूँ साहूकार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
बता मेरे यार सुदामा रे
भाई घने दिनों में आया
घने दिनों में आया
घने दिनों में आया
भाई घने दिनों में आया

एक बेहतर और सफल जिंदगी के लिए हमारे नजरिये और सोच का सकारात्मक होना बेहद जरुरी है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही सुविचार बता रहे हैं जिन्हे पढ़कर आपके सोचने का नजरिया बदल जायेगा।

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