Tag: Shree Ram Ji Bhajan

आओ राम जी भोग लगावो, निज भक्तों का मान बढ़ाओLyrics Verified 

टेर : आओ राम जी भोग लगावो, निज भक्तों का मान बढ़ाओ। दुर्योधन का मेवा त्यागा साग विदुर के घर खाओजी। कैरव कुल के घट की जानी भगत को मान बढ़ायो।। आओ राम जी….. कर्मा के घर खीचड़ खायो रुच रुच भोग लगायो जी। कई दिनों तक दर्शन दीन्हा सुबह श्याम घर आयोजी।। आओ राम

राम जी की निकली सवारी

हो…………सर पे मुकुट सजे मुख पे उजाला, मुख पे उजाला हाथ में धनुष गले में पुष्प माला हम दास इनके ये सबके स्वामी अन्जान हम ये अन्तर्यामी शीश झुकाओ, राम गुन गाओ बोलो जय विष्णु के अवतारी राम जी की निकली सवारी राम जी की लीला है न्यारी ।।१।। एक तरफ़ लक्ष्मण एक तरफ़ सीता

सीताराम कहिये। जाहि विधि राखे राम

सीताराम सीताराम सीताराम कहिये। जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।। मुख में हो राम-नाम राम सेवा हाथ में। तू अकेला नहीं प्यारे राम तेरे साथ में।। विधि का विधान जान हानि-लाभ सहिये। जाहि विधि…… किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा। होगा प्यारे वही जो श्रीरामजी को भायेगा।। फल आशा त्याग शुभ कर्म करते

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुखकर कञ्जपद कञ्जारुणम् १.. कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि नौमि जनक सुतावरम् २.. भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् ३.. सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अङ्ग विभूषणम् आजानुभुज सर चापधर

श्री राम चालीसा – श्री रघुबीर भक्त हितकारी।

॥चौपाई॥ श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥ निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई॥ ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥ दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥ जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला॥ तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण

जय सियाराम – भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला कौसल्या हितकारी

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी॥ कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता। माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता॥ करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

हे रोम रोम मे बसने वाले राम, जगत के स्वामी

हे रोम रोम मे बसने वाले राम, जगत के स्वामी, हे अन्तर्यामी, मे तुझ से क्या मांगूं। ◾️ आप का बंधन तोड़ चुकी हूं, तुझ पर सब कुछ छोड़ चुकी हूं। नाथ मेरे मै क्यूं कुछ सोचूं तू जाने तेरा काम॥ ◾️ तेरे चरण की धुल जो पायें, वो कंकर हीरा हो जाएँ। भाग मेरे

हे राम हे राम जग में साचो तेरो नाम

हे राम, हे राम जग में साचो तेरो नाम हे राम, हे राम ◾️ तू ही माता, तू ही पिता है तू ही तो है राधा का श्याम हे राम, हे राम ◾️ तू अंतर्यामी, सबका स्वामी तेरे चरणों में चारो धाम हे राम, हे राम ◾️ तू ही बिगड़े, तू ही सवारे इस जग

हे राम तुम्हारे चरणों में, जब प्यार किसी को हो जाए।

हे राम तुम्हारे चरणों में, जब प्यार किसी को हो जाए, दो चार जनों की बात तो क्या, संसार का मालिक बन जाए।। ◾️ रावण ने राम से बैर किया, अब तक भी जलाया जाता है, बन भक्त विभीषण शरण गए, घर बार उसी का हो जाए, हे राम तुम्हारे चरणो में, जब प्यार किसी

हम राम जी के राम जी हमारे हैं

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं, वो तो दशरथ राज दुलारे हैं, मेरे नयनो के तारे हैं, सारे जग के रखवारे हैं, मेरे तो प्राण अधारे हैं, सब भगतन के रखवारे हैं, जो लाखो पापीओं को तारे हैं, जो अघमन को उधारे हैं, हम इनके सदा सहारे हैं, हम उनकी शरण पधारे हैं,