Tag: Manish Tiwari

सबसे पहले तुम्हे मनाऊँ गौरी सूत महाराज

सबसे पहले तुम्हे मनाऊँ, गौरी सूत महाराज, तुम हो देवों के सरताज। दूंद दुँदाला सूँड़ सुन्डाला, मस्तक मोटा कान, तुम हो देवों के सरताज। – श्लोक – प्रथमे गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश, त्रितिये सीमरु शारदा, मेरे कण्ठ करो प्रवेश॥ सबसे पहले तुम्हे मनाऊँ, गौरी सूत महाराज, तुम हो देवों के सरताज। दूंद

तुम जो कृपा करो तो मीट जाये विपदा सारी

1. तुम जो कृपा करो तो मीट जाये विपदा सारी, ओ गौरी सूत गणराजा गणनायक गजमुख धारी॥ तुम हो दया के सागर क्या बात है तुम्हारी, ओ गौरी सूत गणराजा गणनायक गजमुख धारी॥ 2. विघ्नौ को हरने वाले सुख शांति देने वाले, मोह पाश काटते हो तुम भक्ति देने वाले, तुमने रचाई सॄष्टि तुम ने

प्रीत मे पूजे नाम तुम्हारा गणपति

प्रीत मे पूजे नाम तुम्हारा, गणपति जगत खिवैया, शिव नँदन अब आज हमारी, पार लगाना नैय्या, जय गौरी के लाला॥ खजराना मे आन बिराजे, ये मेरे गणराज रे,  रिद्धि सिद्धि के दाता देखो, ये मेरे महराज रे, तुम हि दिन बंधु दुख हरता, तुम ही सर्व जगत के कर्ता, आन विराजौ बिछी हुई है, आशाओं की छैया,

तुम जो कृपा करो तो मीट जाये विपदा सारी

तुम जो कृपा करो तो मीट जाये विपदा सारी, ओ गौरी सूत गणराजा गणनायक गजमुख धारी तुम जो कृपा करो तो मीट जाये विपदा सारी, ओ गौरी सूत गणराजा गणनायक गजमुख धारी तुम हो दया के सागर क्या बात है तुम्हारी, ओ गौरी सूत गणराजा गणनायक गजमुख धारी विघ्नौ को हरने वाले सुख शांति देने

सच्ची है तू सच्चा तेरा दरबार माता रानिए।

सच्ची है तू सच्चा तेरा, दरबार माता रानिए, कर दे दया की इक नजर, एक बार माता रानिए, सच्ची है तू सच्चा तेरा, दरबार माता रानिए।। ◾️क्या गम है कैसी उलझन, जब सर पे तेरा हाथ है, हर दुःख में हर संकट में, माता तू हमारे साथ है, तू प्यारी माँ और जग तेरा, परिवार

माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी।

ज्योत जगा के, सर को झुका के मैं मनाऊंगी, दर पे आउंगी, मैं शीश झुकाऊँगी माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी।। ◾️संतो महंतो को बुला के, घर में कराऊं जगराता सुनती है सब की फरियादे, मेरी भी सुन लेगी माता झोली भरेगी, संकट हरेगी, दर पे आऊँगी माँ मुरादे

गजानंद महाराज पधारो कीर्तन की तैयारी है

गजानंद महाराज पधारो, कीर्तन की तैयारी है। – श्लोक – प्रथम मनाये गणेश के, ध्याऊ शारदा मात, मात पिता गुरु प्रभु चरण मे, नित्य नमाऊ माथ॥ गजानंद महाराज पधारो, कीर्तन की तैयारी है, आओ आओ बेगा आओ, चाव दरस को भारी है।। थे आवो ज़द काम बणेला, था पर म्हारी बाजी है, रणत भंवर गढ़

शंकर भोलानाथ है हमारा तुम्हारा।

शंकर भोलानाथ है हमारा तुम्हारा हमारा तुम्हारा, महाकाल की नगरी मे पाउ जनम दोबारा ◾️इस नगरी के कंकर पथर हम बन जाए, भक्त हमारे उपर चड़कर मंदिर जाए, भक्तजनो के पाव पड़े तो हो उद्धार हमारा, बाबा भोलानाथ है हमारा तुम्हारा ◾️जब भी ये तन त्यागु त्यागु क्षिप्रा तट पर , इतना करना स्वामी ओर

राम कहने से तर जाएगा, पार भव से उत्तर जायेगा।

राम कहने से तर जाएगा, पार भव से उत्तर जायेगा। ◾️ उस गली होगी चर्चा तेरी, जिस गली से गुजर जायेगा। राम कहने से तर जाएगा… ◾️ बड़ी मुश्किल से नर तन मिला, कल ना जाने किधर जाएगा। राम कहने से तर जाएगा… ◾️ अपना दामन तो फैला ज़रा, कोई दातार भर जाएगा। राम कहने

बजरंग बाला ने पवन के लाला ने कोटन कोट प्रणाम।।

बजरंग बाला ने पवन के लाला ने कोटन कोट प्रणाम।। बजरंग बाला ने पवन के लाला ने कोटन कोट प्रणाम भिखारी तेरे द्वार का बजरँग बाला ने पवन के लाला ने कोटन कोट प्रणाम।। ◾️ कैसा कैसा काम राजा राम का बनाया दरिया ने लांघ सूद सीता जी की ल्याया अंजनी का लाड़ला लाड़ला लाड़ला