Tag: Lakhbir singh lakha

प्यारा सजा है द्वार भवानी

बड़ा प्यारा सजा है द्वार भवानी । भक्तों की लगी है कतार भवानी ॥ प्यारा सजा….. ऊँचे पर्वत भवन निराला । आके शीश निवावे संसार, भवानी ॥ प्यारा सजा….. जगमग जगमग ज्योत जगे है । तेरे चरणों में गंगा की धार, भवानी ॥ तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥ प्यारा सजा….. लाल चुनरिया

माँ वीणा पानी हो विद्या वरदानी हो।

माँ वीणा पानी हो, विद्या वरदानी हो, मेहरो वाली हो, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, अपने भक्तो की, अपने बच्चो की तुम रखवाली हो, मेरी माँ, ओ माँ।। ◾️नाम है जितने माता तुम्हारे, एक रूप के हे जगदम्बे, रूप अनेको सारे, शारदे माँ हो तुम, लक्ष्मी माँ हो तुम, कहीं पे काली

मेरी विपदा टाल दो आकर हे जग जननी माता।

मेरी विपदा टाल दो आकर, हे जग जननी माता।। ◾️तू वरदानी है, आद भवानी है, माँ तू वरदानी है, आद भवानी है, क्या में तेरा लाल नहीं हूँ, क्या तू माँ नहीं मेरी, फिर क्यों लगाई देरी, तू ही कहदे है ये कैसा, माँ बेटे का नाता, शेरों वाली माता, शेरों वाली माता।। ◾️में अज्ञानी

नित महिमा मैं गाउँ मैया तेरी।

नित महिमा मैं गाउँ मैया तेरी, ◾️और क्या माँगू मैं तुमसे माता, बस धूल चरण की चाहूँ, पल पल याद करूँ मैं तुमको, मैं हिरे रतन ना चाहूँ, अब तक तेरा प्यार मिला है, माँ हर मांग मिली मेरे मन की, आगे भी तू रखना दया माँ, तू मालिक है त्रिभुवन की, नित महिमा मैं

मेहंदी रची थारे हाथा में।

मेंहदी रची थारे हाथा मे, उड रहयो काजल आंख्या मे, चुनडी रो रंग सुरंग म्हारी आमज माँ।। ◾️अरे चांद उग्यो ओ राता मे, फूल उग्यो रण बागा मे, अरे चांद उग्यो ओ राता मे, फूल उग्यो रण बागा मे, थारो ऐसो सुहाणौ रूप म्हारी दुर्गा माँ मेंहदी रची थारे हाथा मे,,,,,औहौ। ◾️अरे रूप सुहाणौ जद

मैया अम्बे मैया लाल तेरा घबराये हर पल तुझे बुलाये।

मैया अम्बे मैया, लाल तेरा घबराये हर पल तुझे बुलाये। ◾️मैया अंबे मैया मैया अम्बे मैया, लाल तेरा घबराये हर पल तुझे बुलाये, माँ लाल तेरा घबराये रो रो तुझे बुलाये, राह निहारे सुबह शाम, मैया अम्बे मैया मैया अम्बे मैया।। ◾️बिच भवर मैं मेरी नैया, अटकी री माँ, गम की लहरो में भटकी री

दर दर का भटकना छूट गया जबसे माँ तेरा द्वार मिला।

दर दर का भटकना छूट गया, जबसे माँ तेरा द्वार मिला, द्वार मिला, द्वार मिला, आँखों से बहते आंसू रुके, बेटे को माँ का प्यार मिला, प्यार मिला, प्यार मिला।। ◾️मन का हर विकार गया, मिल जो द्वार गया, विपदा दूर भगी, सोइ तक़दीर जगी, मजधार में अटका बेड़ा जो, पल में लगा वो पार

माँ तू ही तू माये तू ही तू।

माँ तू ही तू माये तू ही तू, माँ तू ही तू माये तू ही तू।। ◾️जदो अंबर दी कोई निशानी ना सी, ते हवा विच कीते री रवानी ना सी, किते बद्दल ना बारिश ना पाणी ही सी, बस सिवा तेरे कुछ भी महाराणी ना सी, जद किते कुछ ना सी, रौशनी ते हवा,

उड़ जा काले कावा उड़के मैया के भवन में जाना।

जा उड़ जा कालेया कांवा, उड़ मईया के भवन जाना। मेरे दिल की बातें जा के मां को बतलाना। हो राहें तेरी तकते तकते(एएएए–एएए) हो राहें तेरी तकते तकते, सारी उम्र गुजारी, आजा मां इकबारी आजा, करके शेर सवारी, मेरे घर आ मा..ता, आ दुखड़े मिटा माता-2।। मां आ…….. आओ माँ मां आ…….. आओ माँ ◾️तेरी

नाम तेरा दुर्गे मैया हो गया दुर्गुणों का नाश।

नाम तेरा दुर्गे मैया हो गया, दुर्गुणों का नाश करते करते। श्लोक – तुम्ही को जपते, है जग के प्राणी, ब्रम्हा विष्णु शिव भोले दानी, जगत की विपदा मिटाने वाली, नमोस्तुते माँ अम्बे भवानी, नमोस्तुते माँ अम्बे भवानी। अम्बे भवानी,,, हो ओ, अम्बे भवानी तेरा ध्यान सभी है धरते, नाम तेरा दुर्गे मैया हो गया,