तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी
जाकी अंग-अंग बास समानी

(इस भजन में भक्त ने भगवान के साथ
ऐसे सुन्दर-सुन्दर सम्बन्ध जोड़े है की,
न तो भक्त भगवान से दूर रह सकते है,
और ना ही भगवान भक्त से दूर रह सकते है।)

◾️ प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा
जैसे चितवत चंद चकोरा

◾️ प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी
जाकी अंग-अंग बास समानी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी

◾️ प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती
जाकी जोत बरै दिन राती

◾️ प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी
जाकी अंग-अंग बास समानी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी

◾️ प्रभु जी तुम मोती हम धागा
जैसे सोनहिं मिलत सोहागा

◾️ प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी
जाकी अंग-अंग बास समानी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी

◾️ प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा
ऐसी भक्ति करै रैदासा

◾️ प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी
जाकी अंग-अंग बास समानी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी

गीता की 151 चुनिंदा पंक्तियों का संकलन| आशा है की यह पंक्तियाँ आपने जीवन में सकारात्मकता का संचार करेगी| जय श्री कृष्णा !

प्रेरणादायक अनमोल शायरी-Secrets of Success

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