भज शंकर दीन दयाल कटे भव जाल✓ Lyrics Verified 

टेर : भज शंकर दीन दयाल कटे भव जाल
कटे चौरासी शंकर काशी के बासी।
शंकर…..
मस्तक पे चंद्र बिराजे दर्शन से पातक भाजे,
श्री नीलकंठ भगवन नाम अविनाशी।
शंकर…..
तेरी जटा में गंगा की धारा काटे पाप जगत का सारा
हो सुमिरन से कल्याण कटे यम फांसी।
शंकर…..
जब पिले भांग का प्याला फिर नाचे हो मतवाला,
संग भूत प्रेत बैताल गोरजा दासी।
शंकर…..
तू राम मंदिर में आया संग पारवती को लाया
धर अन्नपूर्णा नाम जगत पोखासी।
शंकर…..
इण सूरजनारायण स्वामी तेरी माया न पहचानी
ये भूल गया नादान करो अब माफ़ी।
शंकर…..

दोस्तो इस एप्प में आप जानेंगे सफल लोगों की उन 30 आदतों के बारे में जिनकी वजह से वह आज कामयाब हैं। और उन्हें अपनाकर आप भी कामयाब हो सकतें हैं।

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