बजरंग बलि मेरी नाव चली मेरी नाव को पार लगा देना

बजरंग बलि मेरी नाव चली मेरी नाव को पार लगा देना संताप ह्रदय का मिटा देना बजरंग बलि मेरी नाव चली।। मै दास तो आपका जन्म से हूँ बालक और शिष्य भी धर्म से हूँ निर्लज्ज विमुख निज कर्म से हूँ चित से मेरा दोष भुला देना बजरंग बलि मेरी नाव चली।। दुर्बल गरीब और

राम नाम से तूने बन्दे क्यूँ अपना मुख मोड़ा

राम नाम से तूने बन्दे क्यूँ अपना मुख मोड़ा, दौड़ा जाए रे समय का घोड़ा। ◾️ इक दिन बीता खेल-कूद में,इक दिन मौज में सोया, देख बुढ़ापा आया तो क्यों पकड़ के लाठी रोया, अब भी राम सुमिर ले नहीं तो पड़ेगा काल हथौड़ा, दौड़ा जाए रे समय का घोड़ा। ◾️ अमृतमय है नाम हरी

देखे अवध हरसा के जनम भयो राम लाला के

अरि मध्य दिवस न मी तिथि ना अति शीत ना घाम ओ ओ कौशल्या के लाल बन प्रकट भए श्री राम॥ अरि देखे अवध हरसा के देखे अवध हरसा के जनम भयो राम लाला के देखे अवध हरसा के जनम भयो राम लाला के देखे अवध हरसा के जनम भयो राम लाला के॥ राम लाला

बजरंग पलके उठाओ द्वार पे भक्त आये हैँ

बजरंग पलके उठाओ, द्वार पे भक्त आये हैँ, बजरंग पलके उठाओ, द्वार पे भक्त आये हैँ, द्वार पे भक्त आये हैँ। चरणोँ मेँ चढाने को, श्रद्धा सुमन लाये हैँ, श्रद्धा सुमन लाये हैँ॥ बजरंग पलके उठाओ, द्वार पे भक्त आये हैँ, जो मिले, झलक तेरी, मिटे प्यास इन आँखोँ की। मैँने सुना, मेरे बाबा, तूने

बजरंग की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे

बजरंग की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे श्लोक – लाल लंगोटा हाथ में सोटा झांकी अपरम्पार रूप अनोखा आज सजा है बोलो जय जयकार।बजरंग की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे बाबा की झांकी है अपार हनुमत की झांकी है अपार सजा है दरबार भजन हम गाएंगे।। राम

प्यारे हनुमान बाला का घर है निराला

प्यारे हनुमान बाला का घर है निराला यहाँ जिसने भी अलख जगाई उसने मन की मुरादे है पाई उसने मन की मुरादे है पाई प्यारे हनुमान बाला का घर है निराला।। आस्था के फूलों की जो माला पहनाएंगे उनकी राहों के कांटे फूल बन जाएंगे भूल के जहान सारा जिसने यहाँ पर शुद्ध भावना की

ना स्वर है ना सरगम है ना लय न तराना है

ना स्वर है ना सरगम है ना लय न तराना है हनुमान के चरणो में एक फूल चढ़ाना है।। तुम बाल समय में प्रभु सूरज को निगल डाले अभिमानी सुरपति के सब दर्प मसल डाले बजरंग हुए तब से संसार ने जाना है ना स्वर है ना सरगम हैं ना लय न तराना है।। सब

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु। कृपा कर अपनायो॥ जन्म जन्म की पूंजी पाई। जग में सबी खुमायो॥ खर्च ना खूटे, चोर ना लूटे। दिन दिन बढ़त सवायो॥ सत की नाव खेवटिया सतगुरु। भवसागर तरवयो॥ मीरा के प्रभु गिरिधर नगर। हर्ष हर्ष जस गायो॥

देता है वो राम का कदम कदम पर साथ

देता है वो राम का, कदम कदम पर साथ, रहे उसके सर पर हरदम-2, श्री राम प्रभु का हाथ, देता है वो राम का, कदम कदम पर साथ।। जहां जहां श्री राम चलेंगे, वहां वहां हनुमान जी, जैसे जैसे राम कहेंगे, वो ही करेंगे हनुमान जी, प्रभु श्री राम की देखो-2, माने वो सारी बात,

दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं

दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।। हो जाते है जिसके अपने पराये हनुमान उसको कंठ लगाये जब रूठ जाये संसार सारा बजरंगबली तब देते सहारा अपने भक्तो का बजरंगी मान करते है संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।। दुनिया में काम कोई ऐसा नहीं है हनुमान