मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना
मुझे इसका गम नहीं है, बदलेगा यूँ जमाना
मेरी जिंदगी के मालिक, कहीं तुन बदल न जाना
मुझे रास आ गया…
तेरी बंदगी से पहले, मुझे कोण जनता था
तेरी याद ने बना दी, मेरी जिंदगी फ़साना
मुझे रास आ गया…
दुनिया की ठोकरों से, में तंग आ गया हूँ
रहमों कर्म के मालिक, अब दर से ना हटाना
मुझे रास आ गया…
ये सर वो सर नहीं है जो रख दिया उठा लिया
सर रख दिया जो दर पे, आता नहीं उठाना
मुझे रास आ गया…
वो सांवली सी मूरत, मेरे मन में बस गई है
अब आ भी जाओ मोहन, करके कोई बहाना
मुझे रास आ गया…

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