तेरी यमुना दा मीठा मीठा पानी

तेरी यमुना दा मीठा मीठा पानी
मटकियाँ भर लेन दे – तेरी यमुना
मैं तो जब यमुना तट पर आई
आगे मिल गए कृष्ण कन्हाई
मेरी, एक बात ना मानी – मटकियाँ भर लेन दे…
अर्ज करी दोनों कर जोरि
फिर भी उसने बांह मरोरि
फिर खूब हुई खैंचताणि – मटकियाँ भर…
करके बहाना पानी का आई
दिल में मिलान की चाह समाई
मेरा दिलवर तूँ दिलजानी – मटकियाँ भर…
देर हुई तो लड़ेगी जेठानी
डाँटेगी फिर सासु रानी
का करती है नादानी – मटकियाँ भर…
मेरी मटकियां भरदो कान्हा
तेरा कहा मैंने है माना
“प्रेम” तेरी रहूगी दीवानी – मटकियाँ भर…

गीता की 151 चुनिंदा पंक्तियों का संकलन| आशा है की यह पंक्तियाँ आपने जीवन में सकारात्मकता का संचार करेगी| जय श्री कृष्णा !

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