श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे देख लो मेरे दिल के नगीने में॥

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे
देख लो मेरे दिल के नगीने में॥

◾️श्लोक- ना चलाओ बाण
व्यंग के ऐ विभिषण
ताना ना सह पाऊं
क्यूँ तोड़ी है ये माला
तुझे ए लंकापति बतलाऊं
मुझमें भी है तुझमें भी है
सब में है समझाऊँ
ऐ लंकापति विभीषण ले देख
मैं तुझको आज दिखाऊं॥

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में
देख लो मेरे दिल के नगीने में॥

◾️मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए
राम के नाम का मुझ को रस चाहिए
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

◾️श्लोक- अनमोल कोई भी चीज
मेरे काम की नहीं
दिखती अगर उसमे छवि
सिया राम की नहीं॥

◾️राम रसिया हूँ मैं राम सुमिरण करूँ
सिया राम का सदा ही मै चिंतन करूँ
सच्चा आनंद है ऐसे जीने में
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

◾️फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया
भक्ति में मस्ती है, सबको बतला दिया
कोई मस्ती ना, सागर को मीने में
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥

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