आवण में के मजो है, जावण में के मजो है।

आवण में के मजो है, जावण में के मजो है।
थारे मेहंदीपुर का दर्शन, पावण में के मजो है।
हर साल जन्म दिन पर बाबा म्हें दौड़या आवां।
सवा मन को चूरमो म्हें दरबार में चढ़ावां।
खाके जरा तो देखल्यो खांवण में के मजो है।।1।।
जय जय बाबा, जय जय बाबा, जय जय बाबा बोलो।
सिंदूर वर्क खुशबू बाबा थारे चढ़ावां।
ल्याया म्हें गंगाजल भी बाबा थाने नहवावां।
न्हा कर जरा थे देखल्यो, न्हावण में के मजो है।।2।।
जय जय बाबा….
सिया राम राम की ही, दिन रात रट लगावो।
थे राम का पुजारी, नित राम गुण ही गावो।
म्हाने भी अब बतावो, गावण में के मजो है।।3।।
जय जय बाबा….
दुनियां रा दुखड़ा काट्या, मेरी बार कैंया नाट्या।
दर-दर पे म्हें फिरया हाँ, दुनियां रा पगल्या चाट्या।
दर्शन बिना ही जावां, जावण में के मजो है।।4।।
जय जय बाबा….
यो दास भोलो भलो, कर दयो हिये उजालो।
टाबर में थारो, आके जरा सम्भालो।
सिर हाथ न धरो तो, ध्यावण में के मजो है।।5।।
जय जय बाबा….

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