Category: Shri Ram Bhajan

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाये तरुवर की छाया।

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाये तरुवर की छाया ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है।। मैं जबसे सरन तेरी आया, मेरे राम भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल न रहा था सहारा -२ लहरों से लगी हुई नाव को -२ जैसे मिल न रहा हो किनारा-२ इस

श्री काली चालीसा – जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार

॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार॥ अरि मद मान मिटावन हारी। मुण्डमाल गल सोहत प्यारी॥ अष्टभुजी सुखदायक माता। दुष्टदलन जग में विख्याता॥1॥ भाल विशाल मुकुट छवि छाजै। कर में शीश शत्रु का साजै॥ दूजे हाथ लिए मधु प्याला। हाथ तीसरे सोहत भाला॥2॥ चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे। छठे त्रिशूल

श्री राम चालीसा – श्री रघुबीर भक्त हितकारी।

॥चौपाई॥ श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥ निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई॥ ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥ दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥ जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला॥ तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण

जय सियाराम – भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला कौसल्या हितकारी

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी॥ कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता। माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता॥ करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

एक दिन वो भोला भंडारी बनकर सुन्दर नारी।

एक दिन वो भोला भंडारी, बनकर सुन्दर नारी, गोकुल में आ गए हैं। पार्वती ने मना किया तो, ना माने त्रिपुरारी, बिरज में आ गए हैं।। ◾️पार्वती से बोले भोले, मैं भी चलूँगा तेरे संग मैं, राधा संग श्याम नाचे, मैं भी नाचूँगा तेरे संग में, रास रचेगा ब्रज मैं भारी, मुझे दिखाओ प्यारी, बिरज

शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ।

शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ अंत काल को भवसागर में उसका बेडा पार हुआ॥ ◾️भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो। हर हर महादेव शिव शम्भू। हर हर महादेव शिव शम्भू॥ ◾️डमरू वाला हे जग मे दयालु बड़ा, दीन दुखियौ का दाता जगत का पिता, सबपे करता है

हे रोम रोम मे बसने वाले राम, जगत के स्वामी

हे रोम रोम मे बसने वाले राम, जगत के स्वामी, हे अन्तर्यामी, मे तुझ से क्या मांगूं। ◾️ आप का बंधन तोड़ चुकी हूं, तुझ पर सब कुछ छोड़ चुकी हूं। नाथ मेरे मै क्यूं कुछ सोचूं तू जाने तेरा काम॥ ◾️ तेरे चरण की धुल जो पायें, वो कंकर हीरा हो जाएँ। भाग मेरे

हे राम हे राम जग में साचो तेरो नाम

हे राम, हे राम जग में साचो तेरो नाम हे राम, हे राम ◾️ तू ही माता, तू ही पिता है तू ही तो है राधा का श्याम हे राम, हे राम ◾️ तू अंतर्यामी, सबका स्वामी तेरे चरणों में चारो धाम हे राम, हे राम ◾️ तू ही बिगड़े, तू ही सवारे इस जग

हे राम तुम्हारे चरणों में, जब प्यार किसी को हो जाए।

हे राम तुम्हारे चरणों में, जब प्यार किसी को हो जाए, दो चार जनों की बात तो क्या, संसार का मालिक बन जाए।। ◾️ रावण ने राम से बैर किया, अब तक भी जलाया जाता है, बन भक्त विभीषण शरण गए, घर बार उसी का हो जाए, हे राम तुम्हारे चरणो में, जब प्यार किसी

हम राम जी के राम जी हमारे हैं

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं, वो तो दशरथ राज दुलारे हैं, मेरे नयनो के तारे हैं, सारे जग के रखवारे हैं, मेरे तो प्राण अधारे हैं, सब भगतन के रखवारे हैं, जो लाखो पापीओं को तारे हैं, जो अघमन को उधारे हैं, हम इनके सदा सहारे हैं, हम उनकी शरण पधारे हैं,