Category: Shiv Bhajan

ओ भूतनाथ बाबा क्या खेल रचाया है।

ओ भूतनाथ बाबा, क्या खेल रचाया है, दुनिया ये रची तूने, सब तेरी माया है, ओ भूतनाथ बाबा, क्या खेल रचाया है॥ ◾️महलों में दुःख देखे, सड़को पे खुशहाली, महलों में दुःख देखे, सड़को पे खुशहाली, कोई राजा किस्मत का, कोई किस्मत से खाली, सब तेरी लीला है, सब तेरा फ़साना है, ओ भूत नाथ

भोले दानी रे भोले दानी भोले दानी भोले दानी।

भोले दानी रे भोले दानी, श्लोक दिन और दुखियो के तुम हो सहारे, सदा अपने भक्तो को भोले उबारे, भसम भभूति अपने तन पर राजे, नाग गले में डाले पिते हो नित भांग, के भोले जी तुम प्याले॥ भोले दानी, रे भोले दानी, भोले दानी भोले दानी, भोले निराला, पिए सदा भंगिया का प्याला, हे

बम बम ल़हरी शिव शिव ल़हरी सब गायें।

बम बम ल़हरी, शिव शिव ल़हरी, सब गायें, श्लोक शेष नाग को गलपता कियो, शंकर गए कैलाश, अखण्ड तपस्या धारण की, जय जय जय भोले नाथ॥ ◾️शिव समान दाता नही, विपत निवारण हार, अब लज्जा मोरी राखियो, शिव नंदी के असवार॥ ◾️बम बम ल़हरी, शिव शिव ल़हरी, सब गायें, अगड़ बम शिव ल़हरी, बम-बम ल़हरी,

शिव सुमिरन से सुबह शुरू हो शिव मंदिर में शाम हो।

शिव सुमिरन से सुबह शुरू हो, शिव मंदिर में शाम हो, शिव करुणा की छैया में, शाम ढले विश्राम हो॥ ◾️साँसों की में ताल पे मेरी, भक्ति शिव शिव गाये, शिव दीवानी रसना को कोई, दूजा गीत ना भाए, जबतक जीवन ज्योत जले, मेरे होठो पे शिव नाम हो, शिव सुमिरण से सुबह शुरू हो,

दूल्हा बन गया भोला भाला गांजा भांग का पिने वाला।

दूल्हा बन गया भोला भाला, दूल्हा बन गया भोला भाला, गांजा भांग का पिने वाला, इसकी आँख नशे में लाल, देखो लंबे लंबे बाल, के दूल्हा कैलाश पर्वत वाला॥ ◾️ना घोड़े ना हाथी, सब पैदल बाराती, ना घोड़े ना हाथी, सब पैदल बाराती, ना संगी ना साथी, इसकी कोई ना जाती, लगता है अनाथ, इसके

बड़ी दूर से चलकर आया हूँ मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए।

बड़ी दूर से चलकर आया हूँ, बड़ी दूर से चलकर आया हूँ, मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए, मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए, एक फूल गुलाब का लाया हूँ, चरणों में तेरे रखने के लिए॥ ◾️ना रंग महल की अभिलाषा, ना इक्छा सोने चांदी की, ना रंग महल की अभिलाषा, ना इक्छा सोने चांदी

मैं हूँ शरण में तेरी हे नाथ डमरू वाले।

मैं हूँ शरण में तेरी हे नाथ डमरू वाले, दुःख से मुझे उबारो पाँवो में पड़ गए छाले, मैं हूँ शरण में तेरी हे नाथ डमरू वाले॥ ◾️फसीं है भवरो में नैया, बिच मजधार हूँ मैं, सहारा दीजिये आकर, की अब लाचार हूँ मैं, उठते नही कदम अब, थक गए है काशीवाले, मैं हूँ शरण

जयती जयती जय काशी वाले काशीवाले देवघर वाले।

जयती जयती जय काशी वाले, काशीवाले देवघर वाले, श्लोक काशीवाले देवघर वाले भोले डमरू धारी काशीवाले देवघर वाले भोले डमरू धारी, खेल तेरे है नाथ निराले शिवशंकर त्रिपुरारी। जयती जयती जय काशी वाले, काशीवाले देवघर वाले, खेल है तेरे नाथ निराले, जय शंभू जय जय शंभू, भोले जय शंभू जय जय शंभू॥ ◾️जो भी तेरा

भोलेनाथ से निराला कोई और नहीं।

भोले नाथ से निराला कोई और नहीं, गौरीनाथ से निराला कोई और नहीं, ऐसा बिगड़ी बनाने वाला, कोई और नहीं।। ◾️उन का डमरू डम डम बोले, अगम निगम के भेद खोले, ऐसा भक्तो का रखवाला कोई और नहीं, भोले नाथ से निराला कोई और नहीं।। ◾️काया जब जब करवट बदले, पाप चमकते अगले पिछले, ऐसा

मेरा भोलेनाथ ऐसा भक्तो का रखवाला हैं।

मेरा भोलेनाथ ऐसा भक्तो का रखवाला हैं, मेरा भोलेनाथ ऐसा, भक्तो का रखवाला हैं, सचमुच में भोला भाला है, मेरा भोलेनाथ ! ◾️है भांग का रसिया, कैलाश का बसिया, रमिया राम रंग का, है चंद्र मस्तक पर, गले में है विषधर, है धारक गंग का, शरणागत की प्रेम भक्ति का, यही देव मतवाला है, सचमुच