Category: Krishan Bhajan

रुकमणी जीमण दे मने, भक्तों का प्रशाद,Lyrics Verified 

टेर : रुकमणी जीमण दे मने, भक्तों का प्रशाद, प्रेम वाला भोजन ऐ मने, लगे बड़ा स्वाद।। काचे चावल मत ना खाओ, कर से कृपा निधान। कच्चे-कच्चे चावलों से पेट दुखेगा कहा मेरा ले मान।। रुकमणी जीमण दे…. धन्ने भगत की गउए चराई, बाजरे की रोटियां खाई। अपने भक्त के खेत बाजरी, बिना बीज निप

सुमिरण करले मेरा मना बीती उम्र हरि नाम बिना।✓ Lyrics Verified 

टेर : सुमिरण करले मेरा मना बीती उम्र हरि नाम बिना। हस्ती दन्त बिना, पंछि पंख बिना, जिमि राहगीर है पथ बिना। वैश्या का पुत्र पिता बिन हिना, जिमि प्राणी हो प्राण बिना।। सुमिरण करले…… धेनु क्षीर नदियाँ नीर बिन, जैसे नारी पुरुष बिना। जैसे तरवर फल बिन सुना, जिमि धरती रहे मेघ बिना।। सुमिरण

कोणी माने ऐ यशोदा तेरो गिरधारी।✓ Lyrics Verified 

टेर : कोणी माने ऐ यशोदा तेरो गिरधारी। घर का तो छोड़ा कान्हा, महल मालिया, गुजारी की झोपड़ी, लगे प्यारी। कोणी माने ऐ….. घर का तो छोड़ा कान्हा, माखन मिसरी, तने गुजरी की राबड़ी, लगे प्यारी। कोणी माने ऐ….. घर का तो छोड़ा कान्हा, पलंग पथरना, तने गुजरी की गुदड़ी, लगे प्यारी। कोणी माने ऐ…..

मैं तो कृष्ण भजु या राम मेरे दोनों में अटके प्राण✓ Lyrics Verified 

मैं तो कृष्ण भजु या राम : कृष्ण जी और राम जी दोनों एक ही है। एक भगत की भावना को इस भजन में बहुत ही सूंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है।   श्री राम…… राम…….राम……हो हो राम…… राम कृष्ण दोहु एक…. है एक है …… एक है राम कृष्ण दोहु एक…. है अंतर

थारी मुरली मनड़ो मोयो कान्हा और बजाओ थारी मुरली न।✓ Lyrics Verified 

टेर : थारी मुरली मनड़ो मोयो कान्हा और बजाओ थारी मुरली न। आ मुरली मीरा बाई ने मोही राणे न छोड़ मीरां थारे संग होई मेड़तियो छिटकायो कान्हा। आ मुरली राधा प्यारी ने मोही बृज में गोपी लीला होई मधुबन रास रचायो कान्हा। आ मुरली कर्मा बाई न मोही मंदिर में थारी बाटा जोही जीण

या विध गोविन्द भोग लगायो भगत बछल हरि नाम कहायो✓ Lyrics Verified 

शास्त्रों के अनुसार भगवान को आरती के बाद भोग लगाया जाता है। आज हम कृष्ण जी का बहुत ही सूंदर भोग लेके आये है। जो निसंदेह आपको गोविन्द जी के साथ भाव से जोड़ देगा और आपको मन में शांति और श्रद्धा का भाव पैदा करेगा तो आएंगे मेरे साथ इस कृष्णा के भोग को

राधिका गौरी से बृज की छोरी से

कृष्ण – राधिका गौरी से बृज की छोरी से मैया कराय दे मेरो ब्याह यशोदा – उम्र तेरी छोटी है नजर तेरी खोटी है कैसे करा दूँ तेरा ब्याह – राधिका गौरी से कृष्ण – जो नहीं ब्याह करावे, तेरी गैया न चारो आज के बाद मोरी मैया, तेरी देहली पर ना आऊँ आयेगा रे

तेरी यमुना दा मीठा मीठा पानी

तेरी यमुना दा मीठा मीठा पानी मटकियाँ भर लेन दे – तेरी यमुना मैं तो जब यमुना तट पर आई आगे मिल गए कृष्ण कन्हाई मेरी, एक बात ना मानी – मटकियाँ भर लेन दे… अर्ज करी दोनों कर जोरि फिर भी उसने बांह मरोरि फिर खूब हुई खैंचताणि – मटकियाँ भर… करके बहाना पानी

आज बृज में होरी रे रसिया। होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥

आज बृज में होरी रे रसिया। होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥ अपने अपने महलों से निकली, कोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया। कौन गाँव के कुंवर कन्हैया, कौन गाँव राधा गोरी रे रसिया। नन्द गाँव के कुंवर कन्हैया, बरसाने की राधा गोरी रे रसिया। कौन वरण के कुंवर कन्हैया, कौन वरण राधा गोरी रे

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना मुझे इसका गम नहीं है, बदलेगा यूँ जमाना मेरी जिंदगी के मालिक, कहीं तुन बदल न जाना मुझे रास आ गया… तेरी बंदगी से पहले, मुझे कोण जनता था तेरी याद ने बना दी, मेरी जिंदगी फ़साना